
EKPAHEL.IN | लखनऊ। अगर आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं और तस्वीरों के जरिए समाज, संस्कृति और जिंदगी को करीब से देखने का हुनर पसंद करते हैं, तो अलीगंज स्थित कलास्रोत आर्ट गैलरी में लगी फोटो प्रदर्शनी आपके लिए खास हो सकती है। विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर द यूथ फोटोजर्नलिस्ट एसोसिएशन (TYPA) की ओर से यहां 10वीं सामूहिक फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है।
इस वर्ष की प्रदर्शनी देश के प्रख्यात फोटोग्राफर और पद्मश्री से सम्मानित स्वर्गीय रघु राय को समर्पित की गई है। प्रदर्शनी में देश और समाज को अपनी तस्वीरों के जरिए देखने वाले 70 से अधिक छायाकारों की रचनाएं प्रदर्शित की गई हैं।
70 से अधिक छायाकार, हर तस्वीर की अपनी कहानी
TYPA की इस सामूहिक प्रदर्शनी में 70 से अधिक छायाकारों की तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं। तस्वीरों में शहर और गांव से लेकर प्रकृति, संस्कृति, सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदनाओं और रोजमर्रा की जिंदगी के अलग-अलग रंग देखने को मिलते हैं।
खास बात यह है कि हर छायाकार का अपना नजरिया दिखाई देता है। किसी तस्वीर में शहर की भागदौड़ नजर आती है तो किसी में गांव की सादगी, कहीं प्रकृति का सौंदर्य है तो कहीं सामाजिक जीवन की ऐसी तस्वीरें हैं, जो दर्शक को कुछ पल ठहरकर सोचने पर मजबूर करती हैं।
‘फोटोग्राफी सिर्फ तस्वीर नहीं, समाज को देखने का नजरिया’
TYPA के अध्यक्ष साहिल सिद्दकी ने कहा कि विश्व फोटोग्राफी दिवस केवल कैमरे और तस्वीरों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उन लोगों को याद करने का अवसर भी है, जिन्होंने फोटोग्राफी को समाज की आवाज बनाने का काम किया। उन्होंने कहा कि रघु राय को प्रदर्शनी समर्पित करना इसी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
प्रदर्शनी में शामिल छायाकारों का कहना है कि एक अच्छी तस्वीर सिर्फ किसी दृश्य को नहीं दिखाती, बल्कि अपने भीतर समय, समाज और मानवीय भावनाओं को भी संजोकर रखती है। यही वजह है कि फोटोग्राफी महज एक कला नहीं, बल्कि इतिहास और समाज को दर्ज करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
रघु राय की स्मृति में दो मिनट का मौन
प्रदर्शनी का माहौल उस समय भावुक हो गया, जब उपस्थित छायाकारों और दर्शकों ने महान फोटोग्राफर रघु राय को श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट का मौन रखा।
रघु राय की फोटोग्राफी ने दशकों तक भारतीय समाज, संस्कृति, राजनीति और आम जनजीवन के अनगिनत रंगों को कैमरे में कैद किया। उनकी तस्वीरों ने न सिर्फ घटनाओं को दर्ज किया, बल्कि उनके पीछे छिपी मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को भी सामने रखा।
इसी विरासत को याद करते हुए प्रदर्शनी में शामिल छायाकारों ने रघु राय के योगदान को फोटोग्राफी की दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
युवा फोटोग्राफरों के लिए प्रेरणा हैं रघु राय
प्रदर्शनी में शामिल युवा फोटोग्राफरों ने रघु राय की तस्वीरों और उनकी फोटोग्राफी शैली को अपने लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। उनका कहना है कि रघु राय की विरासत आने वाली पीढ़ियों को भी बेहतर तस्वीरें बनाने के साथ-साथ समाज को करीब से देखने और समझने की प्रेरणा देती रहेगी।
आयोजकों के मुताबिक TYPA की यह 10वीं सामूहिक फोटो प्रदर्शनी युवा और अनुभवी छायाकारों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने के साथ-साथ फोटोग्राफी की कला और फोटो पत्रकारिता के महत्व को भी रेखांकित करती है।
अगर आप फोटोग्राफी को सिर्फ तस्वीर खींचने से आगे एक कहानी, भावना और समाज को देखने के नजरिए के तौर पर समझना चाहते हैं, तो यह प्रदर्शनी आपके लिए जरूर देखने लायक है।
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